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Saturday, April 4, 2020









इस मोड़पे मैं क्या करूँ?
छोड़ दूँ तुम्हें या बाँध लूँ?
इस तन में तन्हा उधार है
आखिर जीवन से कैसे जुदा रहूँ?


Friday, August 21, 2015

दिल की लड़ाई

तलवार उठाओ!
न हाथों की ,
न आँखों की ,
पर सच्चे दिल की ,
जो धड़कती है
उस दुश्मन की खोज में,
जो छोड़ देती, उस दिल में,
अपने कुचले हुए दिल की खुश्बू ,
रोम रोम में


Wednesday, June 17, 2015

कुछ रिश्ते...

कुछ रिश्ते हैं ऐसे - 
फूलों का,
तारों का,
और अंधेरे में  
छोटी सी आँखें 
गुम हो जाने का  

Wednesday, February 25, 2015

दिल की बात

लव्ज्ञ कितने
पर होठो तक
आती नही,
दिल के
उस झरोके मे
लटकती है,
जाते भी नही,
सिर्फ एक एह्सास है
गुलाब की खुशबू की तरह,
जो हवा से बिखरा हुआ
पहुचता है,
और रुक जाता है
उस गहरे सन्नाटे पर,
जहॉ तुम और मै नही होते,
सिर्फ एक एहसास होता है,
दिल का ये राज्ञ
पहचानने का,
दिल की बात
दिल से सुनने का

Saturday, October 19, 2013

खामोशी और हलचल

खुला हुआ आसमान,
फैला हआ समुन्दर,
छाये हुए बादल,
तड़पती हुई धरती,,
सब मे एक खामोशी है,
सब मे एक हलचल है;
मै देख़ती हू
अपने दिल से तो,
सब मे एक खुशी भ्ररी
सूनापन है,
जो मेरे दिल से कह्ता है
"ज़्ररा ठह्ररो उस सूनापन मे,
उस मे खो जाओ ,
चक  दे उसको एक बार,
और लूट लो उसका मज़ा";
खामोशी मे भी हलचल है,
हलचल मे भी खामोशी है,
जब दिल मे सूनापन छा जाता है,
तो सारे रङ्ग निकलते है -
वो आसमान, वो बादल,
वो समुन्दर, वो धरती,
सब खिलने लगते है,
खामोशी और हलचल
मिलने लगते है